रिमझिम रिमझिम बरखा आई | सावन और वर्षा ऋतु पर चौपाई छंद

 परिचय

बरसात की रिमझिम फुहारें जब तपती धरती को शीतलता देती हैं, तो प्रकृति हरियाली की सुंदर चादर ओढ़ लेती है। सावन की वर्षा केवल मौसम में बदलाव नहीं लाती, बल्कि मन में उमंग, भक्ति और उल्लास भी भर देती है। खेतों में लहराती फसलें, शिव आराधना, कांवड़ यात्रा, तीज और कजरी के लोकगीत सावन की सांस्कृतिक छटा को और मनोहारी बना देते हैं।

इन्हीं प्राकृतिक और सांस्कृतिक भावों को समेटे प्रस्तुत है “रिमझिम रिमझिम बरखा आई”, एक भावपूर्ण चौपाई छंद, जिसमें वर्षा ऋतु, सावन की हरियाली और शिव-भक्ति का सुंदर चित्रण किया गया है।



रिमझिम रिमझिम बरखा आई, सावन की वर्षा और हरियाली का दृश्य



      चौपाई छंद


रिमझिम रिमझिम बरखा आई ।

धरती पर हरियाली छायी ।।

आतप से अब राहत पायी ।

पुलकित हो धरती मुस्काई ।।


खेतों में फसलें लहराती ।

पावस सबके मन को भाती ।।

भक्ति भाव में सब नर नारी ।

पूजें शिव शंकर त्रिपुरारी ।।


सावन में शिव वंदन करते ।

भोले कष्ट सभी के हरते ।।

बिल्वपत्र घृत दूध चढ़ाते ।

दान भक्ति से पुण्य कमाते ।।


काँवड़ ले काँवड़िये जाते ।

गंंगाजल सावन में लाते ।।

बम बम भोले का जयकारा ।

अंतस में करता उजियारा ।।


नारी सज धज तीज मनाती ।

कजरी लोकगीत हैं गाती ।।

धरती ओढ़े चूनर धानी ।

सावन रिमझिम बरसे पानी ।।


निष्कर्ष

सावन की रिमझिम वर्षा प्रकृति को नवजीवन देने के साथ मनुष्य के भीतर भी आनंद और भक्ति का संचार करती है। हरियाली, शिव आराधना, तीज और कजरी जैसे लोकपर्व सावन की सुंदरता और हमारी सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाते हैं। “रिमझिम रिमझिम बरखा आई” चौपाई छंद के माध्यम से इन्हीं मनभावन सावनी भावनाओं को शब्दों में पिरोने का एक छोटा-सा प्रयास है।



हार्दिक धन्यवाद🙏

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टिप्पणियाँ

  1. वाह !!
    श्रावण मास की छटा बिखेरती सुन्दर चौपाई छंद रचना । सादर नमस्कार सुधा जी !

    जवाब देंहटाएं
  2. सावन रिमझिम बरसे पानी
    धरती ओढ़े चूनर धानी
    सुंदर
    आभार

    जवाब देंहटाएं
  3. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में सोमवार 28 जुलाई 2025 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  4. जय शिव शंकरा।
    सुंदर सहज अच्छी छंदबद्ध कविता। बधाइयां स्वीकार करें।

    जवाब देंहटाएं

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