ठुड्डी को हथेली में टिकाए उदास बैठी बिन्नी से माँ ने बड़े प्यार से पूछा, "क्या हुआ बेटा ये उदासी क्यों"? "मम्मा ! आज मेरे इंग्लिश के मार्क्स पता चलेंगें " "तो ? आपने तो अच्छी तैयारी की थी न एक्जाम की !फिर डर क्यों ? मम्मा ! मुझे लगता है, मैं फेल हो जाउंगी। अरे ! नहीं बेटा ! शुभ-शुभ बोलो, और अच्छा सोचो ! वो कहते हैं न , बी पॉजिटिव ! हम्म, कहते तो हैं पर क्या करूं मम्मा ! खुशी चाहिए तो गंदा सोचना ही पड़ता है । अरे ! ये क्या बात हुई भला ! अच्छा सोचोगे तब अच्छा होगा न ! और बुरा सोचोगे तो बुरा ही होगा, खुशी भी कहाँ से मिलेगी बेटा ! ओह मम्मा ! अच्छा सोचती हूँ तो एक्सपेक्टेशन बढ़ती है, फिर जो भी मार्क्स आते हैं वो कम लगने लगते हैं, फिर दुखी होती हूँ । और इसके अपॉजिट बुरा सोचकर एक्सपेक्टेशन खतम, फिर जो भी मार्क्स आयें वो खुशी देते हैं । इसीलिये खुशी चाहिए तो बुरा सोचना ही पड़ता है मम्मा ! हैं ! कहते हुए अब माँ असमंजस में पड़ गयी। चित्र ,साभार गूगल से पढ़िए एक लघु कहानी ● सोसायटी में कोरोना की दस्तक
वाह!सुधा जी ,बहुत सुंदर हायकु सृजन ।
जवाब देंहटाएंआत्मीय आभार शुभा जी!
हटाएंबेहतरीन और लाजवाब हाइकु सुधा जी!
जवाब देंहटाएंसहृदय धन्यवाद मीना जी!
हटाएंवाह!लाजवाब हाइकु दी।
जवाब देंहटाएंसभी सराहनीय
शरद भोर~
बादलों के ऊपर
बैठी बिल्ली..वाह!
हार्दिक आभार अनीता जी!
हटाएंबहुत ही सुंदर हायकू, सुधा दी।
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद ज्योति जी!
हटाएंबहुत सुंदर हाइकु
जवाब देंहटाएंअत्यंत आभार सखी!
हटाएंआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" गुरुवार 26 नवंबर 2020 को साझा की गयी है.............. पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंआत्मिक आभार एवं धन्यवाद,आ.यशोदा जी! मेरी रचना को ब्लॉग "पाँच लिंको का आनंद में साझा करने हेतु...।
हटाएंवाह!
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद आ. विश्वमोहन जी!
हटाएंबेहतरीन।
जवाब देंहटाएंहार्दिक आभार शिवम जी!
हटाएंवाह ! क्या बात है
जवाब देंहटाएंआत्मिक आभार एवं धन्यवाद आ.सर!
हटाएंशरद भोर~
जवाब देंहटाएंबादलों के ऊपर
बैठी बिल्ली
वाह! सुंदर अभिव्यक्ति
हृदयतल से आभार सधु जी!
हटाएंबेहतरीन हायकू
जवाब देंहटाएंहार्दिक आभार एवं धन्यवाद सर!
हटाएंसुन्दर सृजन - नमन सह।
जवाब देंहटाएंतहेदिल से धन्यवाद सर!
हटाएंहार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.जोशी जी!
जवाब देंहटाएंजी नमस्ते ,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (२८-११-२०२०) को 'दर्पण दर्शन'(चर्चा अंक- ३८९९ ) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है
--
अनीता सैनी
हार्दिक धन्यवाद अनीता जी मेरी रचना को चर्चा मंच पर साझा करने हेतु।
हटाएंबिंब समीपता सुन्दर बन पड़ा है । बहुत सुंदर ।
जवाब देंहटाएंसहृदय आभार आ.अमृता जी!
हटाएंइस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर। बहुत खूब। आपको बधाई। सादर।
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद आ.विरेन्द्र जी!
हटाएंलाजवाब अभिव्यक्ति...
जवाब देंहटाएंसुंदर हायकू...
अत्यंत आभार आ. शरद सिंह जी!
हटाएंशरद भोर~
जवाब देंहटाएंबादलों के ऊपर
बैठी बिल्ली
ये विशेष अच्छा लगा। वैसे सारे हायकू अच्छे हैं।
अत्यंत आभार एवं धन्यवाद, सखी!
हटाएंबहुत सुंदर सृजन सुधा जी ।
जवाब देंहटाएंसुंदर हाइकु,प्रकृतिक बिंबों के साथ।
हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.कुसुम जी!
हटाएंबेहतरीन कविताएं
जवाब देंहटाएंअत्यंत आभार एवं धन्यवाद आ.वर्षा जी!
हटाएंबहुत ही सुन्दर हैं सभी हाइकू ...
जवाब देंहटाएंकुछ शब्दों में दूर की गहरी बात समेट ली है आपने ... बहुत सुन्दर ...