आई है बरसात | वर्षा ऋतु पर रोला छंद)
परिचय
सावन का महीना प्रकृति के सौंदर्य का अनुपम उत्सव लेकर आता है। झमाझम वर्षा, रिमझिम फुहारें, सौंधी मिट्टी की महक, शीतल पुरवाई और मेघों की गर्जना वातावरण को जीवंत बना देती हैं। पेड़-पौधे हरियाली की चादर ओढ़ लेते हैं और नदियाँ-नाले जल से भर उठते हैं। प्रस्तुत रोला छंद में सावन ऋतु की इसी मनमोहक छटा और वर्षा के आनंददायक स्वरूप का सहज एवं भावपूर्ण चित्रण करने का प्रयास किया है।
अनुभूति पत्रिका में प्रकाशित
आया सावन मास, झमाझम बरखा आई।
रिमझिम पड़े फुहार, चली शीतल पुरवाई।
भीनी सौंधी गंध, सनी माटी से आती।
गिरती तुहिन फुहार, सभी के मन को भाती ।।
गरजे नभ में मेघ, चमाचम बिजली चमके ।
झर- झर झरती बूँद, पात मुक्तामणि दमके ।
आई है बरसात, घिरे हैं बादल काले ।
बरस रहे दिन रात, भरें हैं सब नद नाले ।।
रिमझिम पड़े फुहार, हवा चलती मतवाली ।
खिलने लगते फूल, महकती डाली डाली ।
आई है बरसात, घुमड़कर बादल आते ।
गिरि कानन में घूम, घूमकर जल बरसाते ।।
बारिश की बौछार , सुहानी सबको लगती ।
रिमझिम पड़े फुहार, उमस से राहत मिलती ।
बहती मंद बयार , हुई खुश धरती रानी ।
सजी धजी है आज, पहनकर चूनर धानी ।।
निष्कर्ष
सावन केवल वर्षा का मौसम नहीं, बल्कि प्रकृति के नवजीवन, उल्लास और समृद्धि का प्रतीक है। इसकी हर फुहार जीवन में ताजगी और आशा का संचार करती है। आइए, वर्षा ऋतु के इस अनुपम सौंदर्य का आनंद लें और जल तथा प्रकृति के संरक्षण का संकल्प भी करें, ताकि हर सावन इसी प्रकार धरती को हराभरा और जीवन को आनंदमय बनाता रहे।
हार्दिक अभिनंदन आपका🙏
पढ़िए बरसात पर एक और रचना निम्न लिंक पर

वाह
जवाब देंहटाएंवाह !! अति सुन्दर !!
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर छंद हैं ... बरखा की बहार जारी है ...
जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में सोमवार 04 अगस्त 2025 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएं24 मात्राओं में इतनी खूबसूरती से पिरो दिया है आपने भावनाओं को ...वाह
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