ग्रहदोष का असर — एक पारिवारिक कहानी

परिचय

बच्चों की गलतियों को समझाना और उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराना परवरिश का जरूरी हिस्सा है। लेकिन जब अपनेपन के कारण किसी एक बच्चे की गलतियों को बार-बार नजरअंदाज किया जाए और उसके व्यवहार का दोष परिस्थितियों या ग्रह-नक्षत्रों पर डाल दिया जाए, तो इसका असर उसके स्वभाव और आदतों पर पड़ सकता है। यह कहानी इसी सोच और उसके परिणाम को एक पारिवारिक प्रसंग के माध्यम से सामने रखती है।



बच्चों की परवरिश और जिम्मेदारी पर आधारित पारिवारिक कहानी






“माँजी, खाना खा लीजिए न! ऐसे खाने पर क्यों गुस्सा उतारना? चलिए न माँजी! फिर आपकी दवाओं का समय हो रहा है, तबीयत बिगड़ जाएगी। चलिए, खाना खा लीजिए न!”

कितनी देर से सीमा अपनी सासू माँ को मना रही थी, पर सासू माँ आज मुँह फुलाए बैठी थीं। आखिर उनके लाडले पोते बंटी को उसके पापा से डाँट जो पड़ गई थी।

बंटी आजकल अपनी दादी के इसी प्यार का गलत फायदा उठा रहा था। कोई भी गलती करता और डाँट पड़ती तो दादी से शिकायत कर देता। वह जानता था कि दादी सबको डाँट-डपटकर उसे बचा लेंगी। नतीजतन, वह बहुत लापरवाह होता जा रहा था।

उसका सामान पूरे घर में बिखरा रहता। जूते-चप्पल भी वह कभी सही जगह पर नहीं रखता। उसका कमरा भी हमेशा अस्त-व्यस्त रहता। किताबें और कपड़े पूरे कमरे में तितर-बितर फैले रहते।

सीमा उसके कमरे में बिखरा सामान समेटते-समेटते थक जाती। जब भी वह इस बारे में उसे डाँटती या कुछ समझाती, बंटी उलटे उसी से जुबान लड़ाने लगता।

माँ को तो जैसे वह कुछ समझता ही नहीं था। तंग आकर सीमा ने आज उसके पापा से शिकायत कर दी। पापा की डाँट पड़ी तो घड़ियाली आँसू बहाता हुआ दादी से लिपट गया।

बस फिर दादी शुरू हो गईं। बेटा तो ऑफिस के लिए निकल पड़ा, बची बहू! उसे खूब सुनाया। फिर भी चैन नहीं आया तो बाकी का गुस्सा खाने पर भी उतार दिया।

छोटी बबली यह सब देख रही थी। देख रही थी कि माँ के मनाने पर भी दादी मान नहीं रही हैं। दादी भूखी बैठी हैं और मम्मी ने भी तो अभी तक कुछ नहीं खाया है।

वह सोचने लगी—क्यों करते हैं भैया ऐसा? बड़े हैं, पर अक्ल नहीं है जरा भी! और दादी को भी भैया को लेकर क्या हो जाता है! मुझे तो हर छोटी-बड़ी बात पर खूब समझाती हैं। छोटी-सी गलती पर भी खूब डाँटती हैं। पर भैया की गलतियाँ और लापरवाहियाँ तो जैसे इन्हें दिखाई ही नहीं देतीं। पर क्यों? क्यों अनदेखी करती हैं दादी भैया की गलतियों की?

उसने सोचा, आज दादी से पूछ ही लूँ।

पास जाकर बोली, “दादी! क्या हुआ? गुस्सा क्यों हो?”

सुनकर दादी तो जैसे बिफर ही पड़ीं। बोलीं, “अपनी माँ से पूछ! पूछ अपनी माँ से, जिसने बेवजह मेरे बंटी की शिकायत करके उसे डाँट खिलाई। वैसे ही तेरा पापा है, जो इसके कहने में आ जाता है। कितना रो रहा था मेरा बंटी!”

कहते हुए दादी का गला भर आया। दादी को दुखी देखकर बबली भी दुखी होकर उनसे चिपक गई।

दादी फिर गुस्से में बोलीं, “हाथ झड़ रहे थे तेरी माँ के उसका कमरा साफ करके? बिना बात पापा-बेटे के बीच मन-मुटाव करवा दिया। बबली! सुन! आज से तू साफ-सफाई करेगी बंटी के कमरे की। ठीक है? सुन लिया तूने?”

“जी, दादी! मैं कर लूँगी। पर दादी! भैया तो मुझसे भी बड़े हैं न, फिर वे खुद क्यों नहीं करते अपने काम? आपने ही तो बताया है न दादी कि अपना काम खुद करना चाहिए। और अगर काम करने में कुछ गलती हो भी जाए तो अपनी ही गलतियों से हमेशा कुछ सीखना चाहिए। है न दादी?

तभी तो मैं हमेशा अपना काम खुद करती हूँ, पर भैया कभी नहीं करते। क्या उन्हें ऐसा करने की जरूरत नहीं है?”

बबली ने पूछा तो दादी समझाते हुए बोलीं, “जरूरत तो है उसे भी, पर क्या करें बेटा! आजकल उसकी ग्रहदशा ठीक नहीं है। पंडित जी से कुंडली दिखवाई थी मैंने। उन्होंने बताया कि अभी उसके ग्रहों की स्थिति खराब है। उसी के असर से वह कुछ चिड़चिड़ा हो गया है। ऐसे ग्रहदोष में बच्चे चिड़चिड़े और उग्र हो ही जाते हैं। हमें ही ध्यान रखना होगा उसका। और ग्रहशांति का पाठ करवाना होगा। तब वह भी समझदार और शांत स्वभाव का हो जाएगा, तेरी तरह।

“पर देख न तेरी मम्मी के हाल! अरे, ग्रहशांति का पाठ करवाने को तो कहा नहीं तेरे पापा से, ऊपर से ये गृहक्लेश करवा दिया। अब तू ही समझा अपनी माँ को!”

“ठीक है दादी! मैं जरूर बात करूँगी मम्मी-पापा से। पर दादी! मैंने एक बुक में पढ़ा कि अगर हम अच्छे से नहीं रहते, अपना काम अपने-आप नहीं करते, चीजों को अस्त-व्यस्त फैलाकर रखते हैं और घर में जूते-चप्पल सही जगह सलीके से नहीं रखते तो हमारे ग्रहों पर भी इसका गलत असर पड़ता है। मतलब वही... ग्रहदोष लगता है। और फिर ऐसी गलतियों पर जब हमें बार-बार बड़ों की डाँट पड़ती है तो हम चिड़चिड़े भी हो जाते हैं।”

“कहाँ पढ़ा तूने?” दादी ने पूछा।

“एक बुक में। आप पढ़ोगी? मैं लाती हूँ। आप अपना चश्मा पहनिए।”

वह जाने लगी तो दादी बोलीं, “रुक! जाने दे! उसमें तो अंग्रेजी में लिखा होगा न?”

“हाँ दादी! पर यही लिखा है।”

उसने देखा कि दादी उसकी बात बड़े ध्यान से सुन रही हैं, तो समझाते हुए बोली—

“दादी! देखिए न, जैसे मम्मी को जल्दी से गुस्सा नहीं आता, पर पापा को आता है, क्योंकि पापा अपने छोटे-मोटे काम अपने-आप नहीं करते। अपनी चीजें भी इधर-उधर कहीं भी रख देते हैं। मम्मी ही सम्भालती हैं न उनके वॉलेट, हैंकी वगैरह।

तो उन्हें भी ग्रहदोष लगता है। तभी तो पापा के जन्मदिन पर आप ग्रहशांति का पाठ करवाती हैं न पंडित जी से।

दादी! क्या आपने कभी अपने और मम्मी के जन्मदिन पर ग्रहशांति का पाठ करवाया?”

व्यंग्यपूर्ण हँसी हँसते हुए दादी बोलीं, “नहीं! हम औरतों को भला ग्रहशांति के पाठ की क्या जरूरत?”

“वही तो दादी! हमें नहीं पड़ती इसकी जरूरत। क्योंकि हमारे ग्रह कभी खराब होते ही नहीं। हम तो अपना काम हमेशा अपने आप करते हैं और पूरे घर को भी ठीक-ठाक करते रहते हैं। फिर हमारे ग्रह हमेशा शांत ही रहते होंगे।

काश! भैया और पापा भी...”

तभी दादी बीच में ही टोककर बोलीं, “जा, जाकर खाना लगा! मेरा भी और अपनी माँ का भी। वह भी भूखी बैठी होगी अभी तक।”

“जी दादी! आप आ जाओ।”

कहकर बबली खुशी-खुशी खाना लगाने चली गई।

और तब से घर के सारे नियम बदल गए। मम्मी को अब पहले जैसी हड़बड़ी और भागम-भाग नहीं थी, क्योंकि पापा भी अपना वॉलेट वगैरह सही जगह रखकर अपने-आप लेने लगे थे और बंटी का कमरा भी अब व्यवस्थित रहने लगा था।

निष्कर्ष

बच्चों की गलतियों को हर बार किसी बाहरी कारण से जोड़कर अनदेखा करने के बजाय उन्हें अपनी जिम्मेदारियों और गलतियों का एहसास कराना जरूरी है। प्यार अगर अनुशासन और सही मार्गदर्शन से जुड़ा हो, तभी वह बच्चे के व्यक्तित्व को सँवारता है। बबली के सहज सवाल ने दादी को यही बात समझा दी कि आदतों में सुधार के लिए ग्रहों से ज्यादा अपने व्यवहार और परवरिश पर ध्यान देना जरूरी है।


पढ़िए - एक और कहानी

● बच्चों को समझाने का सही तरीका – सासू माँ की सीख देने वाली कहानी

● बदलाव - 'अपनों के खातिर' | प्रेरणादायक हिंदी कहानी


टिप्पणियाँ

  1. आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" मंगलवार 31 जनवरी 2023 को साझा की गयी है
    पाँच लिंकों का आनन्द पर
    आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आपका रचना को मंच प्रदान करने हेतु ।

      हटाएं
  2. अच्छी कहानी ... बहुत कुछ कहती हुई, परम्पराएं घर में बुजुर्गों का होना कितना कुछ सुखा जाता है ...

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर सीखप्रद सृजन । बबली ने दादी को बहुत सुन्दर तरीक़े से सीख दी । लाजवाब सृजन ।

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत प्यारी कहानी, नन्ही बबली जैसी!

    जवाब देंहटाएं
  5. अच्छी गृह व्यवस्था तो अच्छी गृह दशा , सुंदर प्रस्तुति आदरणीय ।

    जवाब देंहटाएं
  6. बबली ने सारी समस्या ही हल कर दी । सार्थक लघु कथा ।

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत ही सरल शब्दों में कही गई शिक्षाप्रद लघुकथा।

    जवाब देंहटाएं
  8. "नहीं हम औरतों को भला ग्रहशान्ति के पाठ की क्या जरूरत" अच्छी बात कही दादी ने . बधाई इस कथा के लिए .

    जवाब देंहटाएं
  9. आदरणीया सुधा देवरनी जी ! प्रणाम !
    बहुत सुंदर कथा , कथ्य एवं संवाद |
    सही कहा आपने , स्त्रियों को यज्ञ और ग्रहशांति की क्या आवश्यकता , उनका जीवन स्वयं समिधा है , होम होकर "होम मेकर" हो जाती है !
    मातृ शक्ति को प्रणाम !

    जवाब देंहटाएं
  10. वाह जी, सुधा जी क्या बात लिखी है,.... बहुत ही सुंदर जी ।

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

फ़ॉलोअर

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

दर्द होंठों में दबाकर....

नयी सोच

ब्लॉग से मुलाकात..बहुत दिनों बाद

लेबल

कविता -हास्यव्यंग1 कहानी18 कह़ानी1 कहानीकविता1 कांवड़1 काव्य रचना1 किसान1 कुण्डलिया छंद5 कुण्डलिया छन्द3 कृत्रिम बुद्धिमत्ता1 कोरोना काल1 गजल9 ग़ज़ल1 गढ़वाली कविता एवं उसका हिन्दी रूपांतरण1 गढ़वाली गीत1 गणपति वंदना1 गणेश भक्ति1 गर्मी पर कविता1 गर्मी पर बाल कविता1 गीत16 गीतात्मक कविता1 गुरु महिमा कविता1 गुरु महिमा पर दोहा मुक्तक1 गृहस्थ जीवन1 घरेलू हिंसा1 चिड़िया1 चौपाई | पावस पर कविता | बरसात पर कविता | सावन | शिव भक्ति1 छंद कविता1 जल संरक्षण पर कविता1 जलवायु परिवर्तन ग्लोबल वार्मिंग1 जीवन की समझ सकारात्मक सोच1 जीवन की सीख1 जीवन दर्शन3 जैसे को तैसा1 डिजिटल जुड़ाव1 तकनीक1 त्याग1 देशभक्ति1 दोहा मुक्तक2 दोहा-मुक्तक1 दोहे7 ध्यान1 नवगीत15 नारी सम्मान1 नारी सशक्तिकरण1 पकौड़े1 परिवार1 पाँच लिंकों का आनंद स्थापना दिवस1 पारिवारिक कहानी3 पारिवारिक रिश्ते1 पारिवारिक लघुकथा1 पारिवारिक संवेदना1 पावस पर कविता1 पुस्तक समीक्षा1 प्रकृति3 प्रकृति कविता3 प्राणायाम1 प्रार्थना5 प्रेणादायक आलेख1 प्रेम कविता1 प्रेरक लघुकथा1 प्रेरणादायक कहानी1 प्रेरणादायक हिंदी कविता2 बच्चों की परवरिश1 बरसात पर कविता2 बारिश पर गीत1 बाल कविता3 बाल मन1 बुज़ुर्ग1 भक्ति कविता5 भक्ति रचना1 भगवान गणेश1 भगवान शिव3 भावनात्मक1 भावनात्मक रचना1 मन1 मनहरण घनाक्षरी2 मनहरण घनाक्षरी छंद5 महादेव1 महिला सशक्तिकरण1 महिला सशक्तिकरण पर प्रेरणादायक कहानी।1 माँ का त्याग1 माँ का प्रेम1 माँ की ममता1 माँ-बेटी1 माता पिता1 माता-पिता1 मानवीय संवेदना1 मानवीय संवेदनाएँ1 मानवीय स्वभाव1 मुक्तक4 मुहावरे पर आधारित लघुकथा1 मोबाइल की लत तकनीक डिजिटल जीवन1 योग1 रक्षाबंधन1 राम भक्ति4 रिश्ते5 रोला छंद2 लघु कथा4 लघु कहानी5 लघुकथा20 लघुकथा | व्यंग्य | समाज | कोरोना काल | मानवीय संवेदना1 लेख6 वर्षा ऋतु3 वसंत पर कविता1 विवाह1 व्यंग कविता1 व्यंग लेख1 व्यंग्य1 शरद ऋतु2 शराब की लत1 शिक्षक दिवस1 शिक्षा -परीक्षा1 शिक्षा-परीक्षा1 शिव भक्ति4 शिव महिमा1 शुभकामना कविता1 श्रीराम2 संघर्ष1 संत1 संवेदनाएँ1 संस्मरण2 संस्मरणात्मक लेख1 सकारात्मक सोच2 सच्ची घटना1 सद्गुरु1 समय1 समीक्षा2 सामाजिक कहानी1 सामाजिक व्यंग्य1 सामाजिक सरोकार1 सामाजिक सोच1 सावन3 सावन पर कविता1 साहित्य1 सैनिक1 स्वास्थ्य1 हाइबन1 हायकु3 हास्यव्यंग कविता1 हास्यव्यंग लघुकथाएं1 हिंदी कविता10 हिंदी कहानी1 हिंदी दोहे1 हिंदी भावनात्मक कहानी1 हिंदी लघुकथा प्रेरक लघुकथा रिश्ते मनमुटाव संवाद जीवन दर्शन1 हिंदी लघुकथा माँ का त्याग प्रेरक लघुकथा प्रेरणादायक कहानी1 हिंदी लेख1 हिंदी साहित्य1
ज़्यादा दिखाएं