रिश्ते


family picture


थोड़ा सा सब्र ,
थोड़ी वफा ...
थोड़ा सा प्यार ,
थोड़ी क्षमा
जो जीना जाने रिश्ते
रिश्तों से है हर खुशी ।

फूल से नाजुक कोमल
ये महकाते घर-आँगन
खो जाते हैं गर  ये तो
लगता सूना सा जीवन ।
       
क्या खोया क्या पाया,
नानी -दादी ने बैठे-बैठे,
यही तो हिसाब लगाया
क्या पाया जीवन में ,जिसने
इनका प्यार न पाया ।
     
 दादाजी-नानाजी की वो नसीहत
 मौसी-बुआ का प्यार ।
 चाचू-मामू संग सैर-सपाटे
 झट मस्ती तैयार ।
     
 कोई हँसाए तो कोई चिढ़ाए
 कोई पापा की डाँट से बचाए
 जीवन के सारे गुर सीख जायें
 हो अगर संयुक्त परिवार ।
 
कितनी भी दौड़ लगा लें,
कितना भी आगे जा लें ।
सूरज चंदा से मिले या,
तारे भी जमीं पर ला लें ।
दुनिया भर की शाबासी से
दिल को चैन कहाँ है ?
अपनोंं के आशीष में ही ,
अपना तो सारा जहाँ है ।
जो जीना जाने रिश्ते
रिश्तों से  है हर खुशी ।

बड़ी ही कोमल नाजुक सी डोरी से
बंधे प्रेम के रिश्ते ।
समधुर भावोंं की प्रणय बन्धन से
जीवन  को सजाएं रिश्ते ।
जोश-जोश में भावावेश में
टूट न जायें रिश्ते ।
बड़े जतन से बड़े सम्भलकर
चलो निभाएं रिश्ते ।
रिश्तों से है हर खुशी ।

व्यावसायिकता को रिश्तों पर
हावी न होने दें तो,
लेन-देन और उपहारों की तुलना
से दूर रखें तो,
अहंकार मद त्याग, सुलभ अपनापन
अपनायें तो,
चिर-जीवन रिश्तों की बगिया हम
महकायें तो,
खुशियों की सौगात लिए आते
जीवन में रिश्ते ।
हर दुख-सुख में साथ निभाते
प्यारे से ये रिश्ते ।
जो जीना जाने रिश्ते
रिश्तों से है हर खुशी ।

                            चित्र : साभार गूगल से

टिप्पणियाँ

  1. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (5-4-22) को "शुक्रिया प्रभु का....."(चर्चा अंक 4391) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी।
    ------------
    कामिनी सिन्हा

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार कामिनी जी मेरी रचना को चर्चा मंच में स्थान देने हेतु ।

      हटाएं
  2. जोश-जोश में भावावेश में
    टूट न जायें रिश्ते ।
    बड़े जतन से बड़े सम्भलकर
    चलो निभाएं रिश्ते ।
    बहुत बहुत सुंदर भाव ।
    रिश्तों को बस सहेज कर रखो ,हाँ त्याग जरूरी है पर इस अथाह दौलत पर सब कुछ निछावर करना आना जरूरी है।
    बहुत बहुत सुंदर।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. जी, सारगर्भित प्रतिक्रिया हेतु तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आ.कुसुम जी !

      हटाएं


  3. क्या खोया क्या पाया,
    नानी -दादी ने बैठे-बैठे,
    यही तो हिसाब लगाया
    क्या पाया जीवन में ,जिसने
    इनका प्यार न पाया ।///
    प्रिय सुधा जी, खोते-से जा रहे सुन्दर पारिवारिक रिश्तों का स्मरण कराती रचना मन को छू गई। सच कहूँ तो हमारी पीढ़ी परम सौभाग्शाली रही जिसे सयुक्त परिवार के रूप में अनेक रिश्ते मिले दादी-नानी की प्रेरक कथाएँ और संस्कर मिले।भले एक साथ रहना सम्भव ना हो पर आज भी यदि हम चाहें तो रिश्ते निभाना कोई कठिन काम नहीं।एक बहुत ही प्रेरक,उम्दा प्रस्तुति के लिए आभार और बधाई ❤❤🌹🌹🙏

    अपनोंं के आशीष में ही ,
    अपना तो सारा जहाँ है ।

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

फ़ॉलोअर

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

दर्द होंठों में दबाकर....

नयी सोच

ब्लॉग से मुलाकात..बहुत दिनों बाद

लेबल

कविता -हास्यव्यंग1 कहानी18 कह़ानी1 कहानीकविता1 कांवड़1 काव्य रचना1 किसान1 कुण्डलिया छंद5 कुण्डलिया छन्द3 कृत्रिम बुद्धिमत्ता1 कोरोना काल1 गजल9 ग़ज़ल1 गढ़वाली कविता एवं उसका हिन्दी रूपांतरण1 गढ़वाली गीत1 गणपति वंदना1 गणेश भक्ति1 गर्मी पर कविता1 गर्मी पर बाल कविता1 गीत16 गीतात्मक कविता1 गुरु महिमा कविता1 गुरु महिमा पर दोहा मुक्तक1 गृहस्थ जीवन1 घरेलू हिंसा1 चिड़िया1 चौपाई | पावस पर कविता | बरसात पर कविता | सावन | शिव भक्ति1 छंद कविता1 जल संरक्षण पर कविता1 जलवायु परिवर्तन ग्लोबल वार्मिंग1 जीवन की समझ सकारात्मक सोच1 जीवन की सीख1 जीवन दर्शन3 जैसे को तैसा1 डिजिटल जुड़ाव1 तकनीक1 त्याग1 देशभक्ति1 दोहा मुक्तक2 दोहा-मुक्तक1 दोहे7 ध्यान1 नवगीत15 नारी सम्मान1 नारी सशक्तिकरण1 पकौड़े1 परिवार1 पाँच लिंकों का आनंद स्थापना दिवस1 पारिवारिक कहानी3 पारिवारिक रिश्ते1 पारिवारिक लघुकथा1 पारिवारिक संवेदना1 पावस पर कविता1 पुस्तक समीक्षा1 प्रकृति3 प्रकृति कविता3 प्राणायाम1 प्रार्थना5 प्रेणादायक आलेख1 प्रेम कविता1 प्रेरक लघुकथा1 प्रेरणादायक कहानी1 प्रेरणादायक हिंदी कविता2 बच्चों की परवरिश1 बरसात पर कविता2 बारिश पर गीत1 बाल कविता3 बाल मन1 बुज़ुर्ग1 भक्ति कविता5 भक्ति रचना1 भगवान गणेश1 भगवान शिव3 भावनात्मक1 भावनात्मक रचना1 मन1 मनहरण घनाक्षरी2 मनहरण घनाक्षरी छंद5 महादेव1 महिला सशक्तिकरण1 महिला सशक्तिकरण पर प्रेरणादायक कहानी।1 माँ का त्याग1 माँ का प्रेम1 माँ की ममता1 माँ-बेटी1 माता पिता1 माता-पिता1 मानवीय संवेदना1 मानवीय संवेदनाएँ1 मानवीय स्वभाव1 मुक्तक4 मुहावरे पर आधारित लघुकथा1 मोबाइल की लत तकनीक डिजिटल जीवन1 योग1 रक्षाबंधन1 राम भक्ति4 रिश्ते5 रोला छंद2 लघु कथा4 लघु कहानी5 लघुकथा20 लघुकथा | व्यंग्य | समाज | कोरोना काल | मानवीय संवेदना1 लेख6 वर्षा ऋतु3 वसंत पर कविता1 विवाह1 व्यंग कविता1 व्यंग लेख1 व्यंग्य1 शरद ऋतु2 शराब की लत1 शिक्षक दिवस1 शिक्षा -परीक्षा1 शिक्षा-परीक्षा1 शिव भक्ति4 शिव महिमा1 शुभकामना कविता1 श्रीराम2 संघर्ष1 संत1 संवेदनाएँ1 संस्मरण2 संस्मरणात्मक लेख1 सकारात्मक सोच2 सच्ची घटना1 सद्गुरु1 समय1 समीक्षा2 सामाजिक कहानी1 सामाजिक व्यंग्य1 सामाजिक सरोकार1 सामाजिक सोच1 सावन3 सावन पर कविता1 साहित्य1 सैनिक1 स्वास्थ्य1 हाइबन1 हायकु3 हास्यव्यंग कविता1 हास्यव्यंग लघुकथाएं1 हिंदी कविता10 हिंदी कहानी1 हिंदी दोहे1 हिंदी भावनात्मक कहानी1 हिंदी लघुकथा प्रेरक लघुकथा रिश्ते मनमुटाव संवाद जीवन दर्शन1 हिंदी लघुकथा माँ का त्याग प्रेरक लघुकथा प्रेरणादायक कहानी1 हिंदी लेख1 हिंदी साहित्य1
ज़्यादा दिखाएं