प्रीत की बरखा लिए, लो आ गए ऋतुराज

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  बाग की क्यारी के पीले हाथ होते आज प्रीत की बरखा लिए, लो आ गए ऋतुराज  फूल,पाती, पाँखुरी, धुलकर निखर गयी श्वास में सरगम सजी, खुशबू बिखर गयी भ्रमर दल देखो हुए हैं प्रेम के मोहताज प्रीत की बरखा लिए, लो आ गए ऋतुराज  । आम बौराने लगे, कोयल मधुर गाती ठूँठ से लिपटी लता, हिलडुल रही पाती लगती बड़ी बहकी हवा, बदले से हैं अंदाज प्रीत की बरखा लिए, लो आ गए ऋतुराज  । सौंधी महक माटी की मन को भा रही है अंबर से झरती बूँद  आशा ला रही है  टिपटिप मधुर संगीत सी  भीगे से ज्यों अल्फ़ाज़ प्रीत की बरखा लिए, लो आ गए ऋतुराज । पढ़िये एक और रचना निम्न लिंक पर ●  बसंत की पदचाप

करते रहो प्रयास (दोहे)


Success


1. करते करते ही सदा, होता है अभ्यास ।

    नित नूतन संकल्प से, करते रहो प्रयास।।


2. मन से कभी न हारना, करते रहो प्रयास ।

  सपने होंगे पूर्ण सब, रखना मन में आस ।।


3. ठोकर से डरना नहीं, गिरकर उठते वीर ।

  करते रहो प्रयास नित, रखना मन मे धीर ।।


4. पथबाधा को देखकर, होना नहीं उदास ।

   सच्ची निष्ठा से सदा, करते रहो प्रयास ।।


5. प्रभु सुमिरन करके सदा, करते रहो प्रयास ।

   सच्चे मन कोशिश करो, मंजिल आती पास ।।



हार्दिक अभिनंदन🙏

पढ़िए एक और रचना निम्न लिंक पर

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टिप्पणियाँ

  1. सुंदर,प्रेरक, सकारात्मक संदेश देती ऊर्जावान अभिव्यक्ति दी।
    सस्नेह
    सादर।
    ----
    नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना मंगलवार १४ अक्टूबर २०२५ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  2. सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती बहुत सुन्दर दोहावली ।

    जवाब देंहटाएं
  3. सार्थक, सामयिक बहुत सुन्दर होदे ...

    जवाब देंहटाएं
  4. ये दोहे सच में मन को हिम्मत देते हैं। आप बड़ी सरल भाषा में बहुत काम की बात कह जाते हैं। मुझे अच्छा लगा कि आप अभ्यास, धैर्य और भरोसे को बार-बार याद दिलाते हैं, क्योंकि असल ज़िंदगी में यही सबसे ज़्यादा काम आते हैं।

    जवाब देंहटाएं

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