छटाँक भर का
"ओ गॉड ! ये तो मेरे साथ चीटिंग है " ! एयरपोर्ट से बाहर निकलते बेटे के मुँह से ऐसे शब्द सुनते ही शर्मा जी और उनकी पत्नी एक दूसरे का मुँह ताकने लगे । बेटे से मिलने का उत्साह जैसे कुछ ठंडा सा पड़ गया । सोचने लगे कहाँ तो हमें लगा कि इतने समय बाद हमें देखकर बेटा खुश होगा पर ये तो भगवान को ही कोसने लगा है" । तभी बेटा आकर दोनों के पैर छूकर गले मिला और फटाफट सामान को गाड़ी में रखवा कर तीनों जब बैठ गए तब पापा ने चुटकी लेते हुए कहा , " क्यों रे ! किसका इंतजार था तुझे ? कौन आयेगा तुझे लेने यहाँ..?.. हैं ?... अच्छा आज तो वेलेंटाइन डे हुआ न तुम लोगों का ! कहीं कोई दोस्त तो नहीं आयी है लेने ! हैं ?.. बता दे "? बेटा चिढ़ते हुए - "मम्मी ! देख लो पापा को ! कुछ भी बोल देते हैं" । "सही तो कह रहे तेरे पापा" - मम्मी भी मुस्कुराते हुए बोली, "हमें देखकर भगवान को जो कोसने लगा तू ! क्या कह रहा था ये- " ओ गॉड ! ये तो मेरे साथ चीटिंग है " दोनों ने एकसाथ दोहराया और हँसने लगे । "शिट ! तो आप लोगों ने सुन लिया" ? "बेवकूफ ! गॉड ने हमें भी...

करते रहो प्रयास बहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंसुंदर
जवाब देंहटाएंसुंदर,प्रेरक, सकारात्मक संदेश देती ऊर्जावान अभिव्यक्ति दी।
जवाब देंहटाएंसस्नेह
सादर।
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नमस्ते,
आपकी लिखी रचना मंगलवार १४ अक्टूबर २०२५ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
सुंदर बोध देते दोहे
जवाब देंहटाएंसकारात्मक ऊर्जा का संचार करती बहुत सुन्दर दोहावली ।
जवाब देंहटाएंसार्थक, सामयिक बहुत सुन्दर होदे ...
जवाब देंहटाएंये दोहे सच में मन को हिम्मत देते हैं। आप बड़ी सरल भाषा में बहुत काम की बात कह जाते हैं। मुझे अच्छा लगा कि आप अभ्यास, धैर्य और भरोसे को बार-बार याद दिलाते हैं, क्योंकि असल ज़िंदगी में यही सबसे ज़्यादा काम आते हैं।
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