तीन कुण्डलिया :- भारत महान, हार और विचलित
अनुभूति पत्रिका में प्रकाशित तीन कुण्डलिया कुण्डलिया हिन्दी साहित्य का एक लोकप्रिय छंद है जो अपनी लय, भाव और संदेश के कारण पाठकों को आकर्षित करता है। प्रस्तुत हैं तीन कुण्डलिया— 'भारत महान', 'हार' और 'विचलित'। इन रचनाओं में देशप्रेम, संघर्ष में सकारात्मक सोच तथा मानसिक संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया गया है। भारत महान सारे जग मे हो रहा ,भारत का गुणगान । शुभ संस्कारी भावना, है इसकी पहचान । है इसकी पहचान, सभ्यता बड़ी निराली । सर्व धर्म सत्कार, बनाता गौरवशाली । कहे सुधा सुन मीत, लगा लो तुम भी नारे । भारत देश महान, कह रहे जग में सारे।। हार हार करें स्वीकार जो, होते नहीं निराश । सतत परिश्रम कर सदा,मन में रखते आस ।। मन में रखते आस, नहीं बाधा से डरते । गिरकर उठते रोज, कभी ना मन से थकते ।। कहे सुधा निज बात, है यही जीत का सार । करते रहें प्रयास, सौपान बनेगी हार ।। बिचलित विचलित गर मन हो रहा, कर लें प्राणायाम । साधें श्वास - प्रश्वास निज, मिले सुखद आराम ।। मिले सुखद आराम, धैर्य मन में है आता । मिटे बिचार विकार, भाव निर्मल हो जाता ।। कहे सुधा सुन मीत,श्वास साधें जो नियमित...

अरे वाह्ह दी बरसा ऋतु का मनमोहक चित्र खींचती बहुत सुंदर कुंडलिनी।
जवाब देंहटाएंप्रणाम दी
सादर।
जी नमस्ते ,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (०६-०८-२०२३) को 'क्यूँ परेशां है ये नज़र '(चर्चा अंक-४६७५ ) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
सादर
बहुत सुंदर, सावन मे शिवभक्ति में लीन काँवर यात्रा का अनुभव अनमोल है🙏
जवाब देंहटाएंभोले की भक्ति में सरोबर सुंदर …
जवाब देंहटाएंसावन की मनमोहक छटा बिखेरती सुंदर रचना
जवाब देंहटाएंमृदुल काव्य कृति
जवाब देंहटाएंजय भोले शंकर !
जवाब देंहटाएंसुधा जी, आपकी वन्दना सुन कर भोले बाबा अति प्रसन्न होंगे.
हमारे घर के पास विशाल गौरी शंकर मन्दिर है.
सावन के हर सोमवार को तो वहां भक्तों का मेला सा लग जाता है.
वाह! सुधा जी ,भक्ति भाव से भीगी हुई सुन्दर प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंवाह बहुत मनमोहक सृजन
जवाब देंहटाएंसावन मास पर बहुत सुंदर मनहर कुंडलियां।
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