ये माँ भी न !...

Rupee in palm


 ट्रेन में बैठते ही प्रदीप ने अपनी बंद मुट्ठी खोलकर देखी तो आँखों में नमी और होठों में मुस्कुराहट खिल उठी ।  साथ बैठे दोस्त राजीव ने उसे देखा तो आश्चर्यचकित होकर पूछा, "क्या हुआ ? तू हँस रहा है या रो रहा है " ? 

अपनी बंद मुट्ठी को धीरे से खोलकर दो सौ का नोट दिखाते हुए प्रदीप बोला , "ये माँ भी न ! जानती है कि पिचहत्तर हजार तनख्वाह है मेरी । फिर भी ये देख ! ये दो सौ रुपये का नोट मेरी मुट्ठी में बंद करते हुए बोली , रास्ते में कुछ खा लेना" ।  कहते हुए उसका गला भर आया । 


टिप्पणियाँ

  1. तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार यशोदा जी मेरी रचना पाँच लिंकों के आनंद मंच के लिए चयन करने हेतु ।

    जवाब देंहटाएं
  2. माँ होकर जाना माँ क्या होती है

    अद्धभुत अनुभूति का सुन्दर वर्णन

    जवाब देंहटाएं

  3. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा आज गुरुवार (११-०५-२०२३) को 'माँ क्या गई के घर से परिंदे चले गए'(अंक- ४६६२) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हार्दिक धन्यवाद एवं आभार अनीता जी ! मेरी रचना को चर्चा मंच में स्थान देने के लिए ।

      हटाएं
  4. वाह सखी अंतर्मन को छू गई आपकी रचना, हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं आपको

    जवाब देंहटाएं
  5. मेरी माँ तो रूपये-पैसे देने के बजाय पूड़ी-सब्ज़ी देते हुए कहती थीं - रास्ते में उल्टा-सीधा ख़रीद कर मत खाइयो.

    जवाब देंहटाएं
  6. ये माँ भी न ...... बहुत भावपूर्ण लघुकथा ।

    जवाब देंहटाएं
  7. चंद लाइनों में कितनी भावनाएं समेट दी है आपने, दिल को छू गई❣️

    जवाब देंहटाएं
  8. माँ तो माँ होती है .....।बहुत खूब सुधा जी ।

    जवाब देंहटाएं
  9. ममता के भाओं से ओतप्रोत रचना

    जवाब देंहटाएं
  10. माँ के वात्सल्य के आगे पद,प्रतिष्ठा धन सब छोटे पड़ जाते हैं.

    जवाब देंहटाएं
  11. माएँ ऐसी ही होती हैं, प्यारी लघुकथा

    जवाब देंहटाएं
  12. मां के इस प्यार का कोई मोल नहीं

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

फ़ॉलोअर

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

दर्द होंठों में दबाकर....

नयी सोच

ब्लॉग से मुलाकात..बहुत दिनों बाद

लेबल

कविता -हास्यव्यंग1 कहानी18 कह़ानी1 कहानीकविता1 कांवड़1 काव्य रचना1 किसान1 कुण्डलिया छंद5 कुण्डलिया छन्द3 कृत्रिम बुद्धिमत्ता1 कोरोना काल1 गजल10 गढ़वाली कविता एवं उसका हिन्दी रूपांतरण1 गढ़वाली गीत1 गणपति वंदना1 गणेश भक्ति1 गर्मी पर कविता1 गर्मी पर बाल कविता1 गीत16 गीतात्मक कविता1 गुरु महिमा कविता1 गुरु महिमा पर दोहा मुक्तक1 गृहस्थ जीवन1 घरेलू हिंसा1 चिड़िया1 चौपाई | पावस पर कविता | बरसात पर कविता | सावन | शिव भक्ति1 छंद कविता1 जल संरक्षण पर कविता1 जलवायु परिवर्तन ग्लोबल वार्मिंग1 जीवन की समझ सकारात्मक सोच1 जीवन की सीख1 जीवन दर्शन3 जैसे को तैसा1 डिजिटल जुड़ाव1 तकनीक1 त्याग1 देशभक्ति1 दोहा मुक्तक2 दोहा-मुक्तक1 दोहे7 ध्यान1 नवगीत15 नारी सम्मान1 नारी सशक्तिकरण1 पकौड़े1 परिवार1 पाँच लिंकों का आनंद स्थापना दिवस1 पारिवारिक कहानी2 पारिवारिक रिश्ते1 पारिवारिक लघुकथा1 पारिवारिक संवेदना1 पावस पर कविता1 पुस्तक समीक्षा1 प्रकृति3 प्रकृति कविता3 प्राणायाम1 प्रार्थना5 प्रेणादायक आलेख1 प्रेम कविता1 प्रेरक लघुकथा1 प्रेरणादायक कहानी1 प्रेरणादायक हिंदी कविता2 बरसात पर कविता2 बारिश पर गीत1 बाल कविता3 बाल मन1 बुज़ुर्ग1 भक्ति कविता5 भक्ति रचना1 भगवान गणेश1 भगवान शिव3 भावनात्मक1 भावनात्मक रचना1 मन1 मनहरण घनाक्षरी2 मनहरण घनाक्षरी छंद5 महादेव1 महिला सशक्तिकरण1 महिला सशक्तिकरण पर प्रेरणादायक कहानी।1 माँ का त्याग1 माँ का प्रेम1 माँ की ममता1 माँ-बेटी1 माता पिता1 माता-पिता1 मानवीय संवेदना1 मानवीय स्वभाव1 मुक्तक4 मुहावरे पर आधारित लघुकथा1 मोबाइल की लत तकनीक डिजिटल जीवन1 योग1 रक्षाबंधन1 राम भक्ति4 रिश्ते3 रोला छंद2 लघु कथा4 लघु कहानी5 लघुकथा20 लघुकथा | व्यंग्य | समाज | कोरोना काल | मानवीय संवेदना1 लेख6 वर्षा ऋतु3 वसंत पर कविता1 विवाह1 व्यंग कविता1 व्यंग लेख1 व्यंग्य1 शरद ऋतु2 शराब की लत1 शिक्षक दिवस1 शिक्षा -परीक्षा1 शिक्षा-परीक्षा1 शिव भक्ति4 शिव महिमा1 शुभकामना कविता1 श्रीराम2 संघर्ष1 संत1 संवेदनाएँ1 संस्मरण2 संस्मरणात्मक लेख1 सकारात्मक सोच2 सच्ची घटना1 सद्गुरु1 समय1 समीक्षा2 सामाजिक कहानी1 सामाजिक व्यंग्य1 सावन3 सावन पर कविता1 साहित्य1 सैनिक1 स्वास्थ्य1 हाइबन1 हायकु3 हास्यव्यंग कविता1 हास्यव्यंग लघुकथाएं1 हिंदी कविता10 हिंदी कहानी1 हिंदी दोहे1 हिंदी भावनात्मक कहानी1 हिंदी लघुकथा प्रेरक लघुकथा रिश्ते मनमुटाव संवाद जीवन दर्शन1 हिंदी लघुकथा माँ का त्याग प्रेरक लघुकथा प्रेरणादायक कहानी1 हिंदी लेख1 हिंदी साहित्य1
ज़्यादा दिखाएं