प्रीत की बरखा लिए, लो आ गए ऋतुराज
बाग की क्यारी के पीले हाथ होते आज प्रीत की बरखा लिए, लो आ गए ऋतुराज फूल,पाती, पाँखुरी, धुलकर निखर गयी श्वास में सरगम सजी, खुशबू बिखर गयी भ्रमर दल देखो हुए हैं प्रेम के मोहताज प्रीत की बरखा लिए, लो आ गए ऋतुराज । आम बौराने लगे, कोयल मधुर गाती ठूँठ से लिपटी लता, हिलडुल रही पाती लगती बड़ी बहकी हवा, बदले से हैं अंदाज प्रीत की बरखा लिए, लो आ गए ऋतुराज । सौंधी महक माटी की मन को भा रही है अंबर से झरती बूँद आशा ला रही है टिपटिप मधुर संगीत सी भीगे से ज्यों अल्फ़ाज़ प्रीत की बरखा लिए, लो आ गए ऋतुराज । पढ़िये एक और रचना निम्न लिंक पर ● बसंत की पदचाप

वाह! पावस की आहट सुनाई दे गई, इन सरस शब्दों की बारिश में।
जवाब देंहटाएंजी, हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आपका ।
हटाएंआपकी इस प्रस्तुति का लिंक 23.6.22 को चर्चा मंच पर चर्चा - 4469 में दिया जाएगा| आपकी उपस्थिति चर्चाकारों का हौसला बढ़ाएगी
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
दिलबाग
हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ. विर्क जी मेरी रचना को मंच प्रदान करने हेतु ।
हटाएंमुझे तो बचकानी सी लगी, झूठी प्रशंसा !! ना बाबा ना
जवाब देंहटाएंजी शायद आपके यहाँ नहीं हुई अभी बारिश।
हटाएंपढ़ने हेतु अत्यंत आभार एवं धन्यवाद आपका ।
आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर गुरुवार 23 जून 2022 को लिंक की जाएगी ....
जवाब देंहटाएंhttp://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!
!
हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ. रविन्द्र जी मेरी रचना चयन करने हेतु ।
हटाएंबहुत सुंदर मधुर रचना
जवाब देंहटाएंदिल से धन्यवाद भारती जी !
हटाएंइस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
जवाब देंहटाएंवर्षा ऋतु का मनोहारी अंकन । सुन्दर सृजन सुधा जी।
जवाब देंहटाएंअत्यंत आभार एवं धन्यवाद मीनाजी।
हटाएंबहुत सुन्दर सरस सामयिक प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद एवं आभार कविता जी !
हटाएंपावस ऋतु का सुंदर वर्णन
जवाब देंहटाएंतहेदिल से धन्यवाद एवं आभार अनिता जी !
हटाएंगर्मी से कुछ राहत पाकर
जवाब देंहटाएंदुनिया सारी चहक उठी
बूँदों की सरगोशी सुनकर
सोंधी मिट्टी महक उठी
बुंदों की ऐसी रिमझिम की आपने जिससे तन और मन दोनों को सुकून मिल गया, वैसे मुम्बई में भी रिमझिम की शुरुआत हो गई है और मौसम खुशनुमा हो गया है, बहुत बहुत बधाई सुधा जी इस मनभावन रचना के लिए 🙏
जी, कामिनी जी तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आपका।
हटाएंवाह! बहुत ही सुंदर सराहनीय सृजन।
जवाब देंहटाएंसादर
अत्यंत आभार प्रिय अनीता जी!
हटाएंबहुत बहुत सुन्दर बहुत बहुत मधुर
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ. आलोक जी !
हटाएंशुरवाती बारिश का बहुत ही सुंदर वर्णन किया है आपने, सुधा दी।
जवाब देंहटाएंतहेदिल से धन्यवाद ज्योति जी !
हटाएंबहुत अच्छी लगी यह कविता!!
जवाब देंहटाएंअत्यंत आभार एवं धन्यवाद संजय जी !
हटाएंबिन बारिश के बरसात का अहसास कराती सुंदर रचना।
जवाब देंहटाएंअत्यंत आभार एवं धन्यवाद जिज्ञासा जी !
हटाएंबस बारिश भी आती ही होगी आपके यहाँ भी ।
हम तो अभी कर रहे वर्षा का इंतज़ार
जवाब देंहटाएंआपकी रचना ने चला दी ठंडी बयार ।
जी, बस आपके यहाँ भी आती ही होगी ठंडी बयार...बरसेगी बारिश खत्म होगा इंतजार
हटाएंदिल से धन्यवाद एवं आभार आपका ।
बारिश का आनंद आ गया। बहुत बढ़िया🌹🌹
जवाब देंहटाएंहृदयतल से धन्यवाद विभा जी !
हटाएंवाह !बरखा के आगमन का कितना सुंदर संजय मनभावन वर्णन।
जवाब देंहटाएंसुंदर सृजन।