तीन कुण्डलिया :- भारत महान, हार और विचलित
अनुभूति पत्रिका में प्रकाशित तीन कुण्डलिया कुण्डलिया हिन्दी साहित्य का एक लोकप्रिय छंद है जो अपनी लय, भाव और संदेश के कारण पाठकों को आकर्षित करता है। प्रस्तुत हैं तीन कुण्डलिया— 'भारत महान', 'हार' और 'विचलित'। इन रचनाओं में देशप्रेम, संघर्ष में सकारात्मक सोच तथा मानसिक संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया गया है। भारत महान सारे जग मे हो रहा ,भारत का गुणगान । शुभ संस्कारी भावना, है इसकी पहचान । है इसकी पहचान, सभ्यता बड़ी निराली । सर्व धर्म सत्कार, बनाता गौरवशाली । कहे सुधा सुन मीत, लगा लो तुम भी नारे । भारत देश महान, कह रहे जग में सारे।। हार हार करें स्वीकार जो, होते नहीं निराश । सतत परिश्रम कर सदा,मन में रखते आस ।। मन में रखते आस, नहीं बाधा से डरते । गिरकर उठते रोज, कभी ना मन से थकते ।। कहे सुधा निज बात, है यही जीत का सार । करते रहें प्रयास, सौपान बनेगी हार ।। बिचलित विचलित गर मन हो रहा, कर लें प्राणायाम । साधें श्वास - प्रश्वास निज, मिले सुखद आराम ।। मिले सुखद आराम, धैर्य मन में है आता । मिटे बिचार विकार, भाव निर्मल हो जाता ।। कहे सुधा सुन मीत,श्वास साधें जो नियमित...

मित्रों से भी विनय करती सोनल
जवाब देंहटाएंआप भी रखना छत पर थोड़ा जल ।
प्रेरित करती हुई पंक्तियाँ।
हृदयतल से आभार संजय जी !
हटाएंआपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज सोमवार 24 फरवरी 2020 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत धन्यवाद यशोदा जी !
जवाब देंहटाएंसादर आभार....।
सुधा जी आपकी लिखी रचना को मेरी धरोहर ब्लॉग पर 24 फरवरी 2020 को साझा की गई है
जवाब देंहटाएंसदर
मेरी धरोहर
सहृदय धन्यवाद संजय जी !
हटाएंसादर आभार।
बहुत ही सुंदर व प्यारी सी रचना, जो पाठकों को मंत्रमुग्ध कर रही है। बहुत-बहुत शुभकामनाएँ आदरणीया ।
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद, पुरुषोत्तम जी !
हटाएंसादर आभार।
बहुत प्रेरणा दायक बाल कविता।
जवाब देंहटाएंबच्चों के साथ बड़े भी इन संवेदनाओं पर ध्यान रखें तो सब कुछ अच्छा हो सकता है ।
सुंदर सृजन सुधा जी।
तहेदिल से धन्यवाद कुसुम जी!
हटाएंसादर आभार।
बहुत प्यारी रचना । नन्हीं सोनल के माध्यम से अच्छी प्रेरणा देती सुंदर रचना ।
जवाब देंहटाएंसहृदय धन्यवाद एवं आभार आ.संगीता जी!
हटाएंबहुत सुंदर प्रेरणादायक रचना, सुधा दी।
जवाब देंहटाएंसहृदय धन्यवाद एवं आभार ज्योति जी!
हटाएंप्रकृति की व्यथा
जवाब देंहटाएंचिड़िये की कथा।
हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.विश्वमोहन जी!
हटाएंवाह!बहुत खूबसूरत ,प्रेरणादायक सृजन सुधा जी ।
जवाब देंहटाएंसहृदय धन्यवाद एवं आभार शुभा जी!
हटाएंबहुत अच्छी लगी,अच्छी बातें सिखाती यह कविता ।
जवाब देंहटाएंसुधा जी,अभिनंदन ।
हार्दिक धन्यवाद एवं आभार नुपुरं जी!
जवाब देंहटाएंबहुत खूबसूरत
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