ज्येष्ठ की तपिश और प्यासी चिड़िया बाल कविता|
परिचय :-
जेठ की तपती दोपहर और सूखते जलस्रोतों के बीच प्यासे पक्षियों की पीड़ा अक्सर अनदेखी रह जाती है।
यह कविता उसी संवेदना को शब्द देती है, जहाँ नन्हीं सोनल पक्षियों की मौन पुकार सुनकर उनके लिए पानी और दाना रखने का छोटा लेकिन सुंदर प्रयास करती है।
यह रचना केवल एक बाल कविता नहीं, बल्कि प्रकृति, दया और जीवों के प्रति प्रेम का संदेश भी है।
अगर हम सभी अपनी छत या आँगन में थोड़ा सा पानी रख दें, तो कई नन्हीं जानों की प्यास बुझ सकती है।
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| गर्मियों में छत पर रखा पानी अनेक पक्षियों की प्यास बुझा सकता है। |
सुबह की ताजी हवा थी महकी
कोयल कुहू - कुहू बोल रही थी ।
घर के आँगन में छोटी सोनल
अलसाई आँखें खोल रही थी ।
कोयल कुहू - कुहू बोल रही थी ।
घर के आँगन में छोटी सोनल
अलसाई आँखें खोल रही थी ।
चीं-चीं कर कुछ नन्ही चिड़ियाँ
सोनल के पास आई ।
सूखी चोंच उदास थी आँखें
धीरे से वे यह बतलाई --
सोनल के पास आई ।
सूखी चोंच उदास थी आँखें
धीरे से वे यह बतलाई --
सुनो सखी ! कुछ मदद करोगी ?
छत पर थोड़ा नीर रखोगी ?
बढ़ रही अब तपिश धरा पर,
सूख गये हैं सब नद-नाले ।
प्यासे हैं पानी को तरसते,
हम अम्बर में उड़ने वाले ।
सूख गये हैं सब नद-नाले ।
प्यासे हैं पानी को तरसते,
हम अम्बर में उड़ने वाले ।
तुम पंखे ,कूलर, ए.सी. में रहते,
हम सूरज दादा का गुस्सा सहते ।
हम सूरज दादा का गुस्सा सहते ।
झुलस रहे हैं, हमें बचालो !
छत पर थोड़ा पानी तो डालो !
जेठ महीना जब से आया,
बिन पानी जीवन मुरझाया ।
छत पर थोड़ा पानी तो डालो !
जेठ महीना जब से आया,
बिन पानी जीवन मुरझाया ।
सुनकर सोनल को तरस आ गया,
चिड़ियों का दुख दिल में छा गया ।
चिड़ियों का दुख दिल में छा गया ।
अब वह सुबह सवेरे उठकर
चौड़े बर्तन में पानी भरकर,
साथ में दाना छत पर रखती है ।
चिड़ियों का दुख कम करती है ।
मित्रों से भी विनय करती सोनल
आप भी रखना छत पर थोड़ा जल ।।
साथ में दाना छत पर रखती है ।
चिड़ियों का दुख कम करती है ।
मित्रों से भी विनय करती सोनल
आप भी रखना छत पर थोड़ा जल ।।
निष्कर्ष :-
यह कविता केवल बच्चों की सरल रचना नहीं, बल्कि मानवता और प्रकृति प्रेम का सुंदर संदेश है। यदि हम सभी अपनी छत पर थोड़ा पानी और दाना रखें, तो अनेक पक्षियों का जीवन बचाया जा सकता है। पर्यावरण संरक्षण केवल पेड़ लगाने से नहीं, जीवों की रक्षा से भी होता है।
✨धन्यवाद🙏

मित्रों से भी विनय करती सोनल
जवाब देंहटाएंआप भी रखना छत पर थोड़ा जल ।
प्रेरित करती हुई पंक्तियाँ।
हृदयतल से आभार संजय जी !
हटाएंआपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज सोमवार 24 फरवरी 2020 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत धन्यवाद यशोदा जी !
जवाब देंहटाएंसादर आभार....।
सुधा जी आपकी लिखी रचना को मेरी धरोहर ब्लॉग पर 24 फरवरी 2020 को साझा की गई है
जवाब देंहटाएंसदर
मेरी धरोहर
सहृदय धन्यवाद संजय जी !
हटाएंसादर आभार।
बहुत ही सुंदर व प्यारी सी रचना, जो पाठकों को मंत्रमुग्ध कर रही है। बहुत-बहुत शुभकामनाएँ आदरणीया ।
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद, पुरुषोत्तम जी !
हटाएंसादर आभार।
बहुत प्रेरणा दायक बाल कविता।
जवाब देंहटाएंबच्चों के साथ बड़े भी इन संवेदनाओं पर ध्यान रखें तो सब कुछ अच्छा हो सकता है ।
सुंदर सृजन सुधा जी।
तहेदिल से धन्यवाद कुसुम जी!
हटाएंसादर आभार।
बहुत प्यारी रचना । नन्हीं सोनल के माध्यम से अच्छी प्रेरणा देती सुंदर रचना ।
जवाब देंहटाएंसहृदय धन्यवाद एवं आभार आ.संगीता जी!
हटाएंबहुत सुंदर प्रेरणादायक रचना, सुधा दी।
जवाब देंहटाएंसहृदय धन्यवाद एवं आभार ज्योति जी!
हटाएंप्रकृति की व्यथा
जवाब देंहटाएंचिड़िये की कथा।
हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.विश्वमोहन जी!
हटाएंवाह!बहुत खूबसूरत ,प्रेरणादायक सृजन सुधा जी ।
जवाब देंहटाएंसहृदय धन्यवाद एवं आभार शुभा जी!
हटाएंबहुत अच्छी लगी,अच्छी बातें सिखाती यह कविता ।
जवाब देंहटाएंसुधा जी,अभिनंदन ।
हार्दिक धन्यवाद एवं आभार नुपुरं जी!
जवाब देंहटाएंबहुत खूबसूरत
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