प्रीत की बरखा लिए, लो आ गए ऋतुराज
बाग की क्यारी के पीले हाथ होते आज प्रीत की बरखा लिए, लो आ गए ऋतुराज फूल,पाती, पाँखुरी, धुलकर निखर गयी श्वास में सरगम सजी, खुशबू बिखर गयी भ्रमर दल देखो हुए हैं प्रेम के मोहताज प्रीत की बरखा लिए, लो आ गए ऋतुराज । आम बौराने लगे, कोयल मधुर गाती ठूँठ से लिपटी लता, हिलडुल रही पाती लगती बड़ी बहकी हवा, बदले से हैं अंदाज प्रीत की बरखा लिए, लो आ गए ऋतुराज । सौंधी महक माटी की मन को भा रही है अंबर से झरती बूँद आशा ला रही है टिपटिप मधुर संगीत सी भीगे से ज्यों अल्फ़ाज़ प्रीत की बरखा लिए, लो आ गए ऋतुराज । पढ़िये एक और रचना निम्न लिंक पर ● बसंत की पदचाप

कुआं नदी को सम्बोधित करके,
जवाब देंहटाएंफिर बोला मर्यादित बनके.......
सुनो नदी !कुछ अनुभव मेरे,
विस्तार ही सब कुछ नहीं बहुतेरे.....
गुणवत्ता बिन व्यर्थ है जीवन ,
बिन उद्देश्य दिग्भ्रमित सा मन....
लक्ष्यविहीन व्यर्थ है विस्तार,
विनाशकारी है अहंकार.......बहुत सुंदर
सस्नेह आभार भाई बहुत शुक्रिया...।
हटाएंवाह वाह अप्रतिम अद्भुत भाव रचना।
जवाब देंहटाएंबहुत ही सुंदर सुधा जी ।
अंहकारी का सदा सर नीचा होता है।
हार्दिक धन्यवाद, कुसुम जी !
हटाएंसस्नेह आभार....
गुणवत्ता बिन व्यर्थ है जीवन ,
जवाब देंहटाएंबिन उद्देश्य दिग्भ्रमित सा मन....
लक्ष्यविहीन व्यर्थ है विस्तार,
विनाशकारी है अहंकार.......वाह !! बहुत ख़ूब आदरणीय
सादर
बहुत बहुत शुक्रिया अनीता जी !
हटाएंसस्नेह आभार आपका...
गुणवत्ता बिन व्यर्थ है जीवन ,
जवाब देंहटाएंबिन उद्देश्य दिग्भ्रमित सा मन....
लक्ष्यविहीन व्यर्थ है विस्तार,
विनाशकारी है अहंकार.......
बेहतरीन रचना सखी 👌🌹
शुक्रिया अनुराधा जी!बहुत बहुत धन्यवाद आपका...
हटाएंगुणवत्ता बिन व्यर्थ है जीवन ,
जवाब देंहटाएंबिन उद्देश्य दिग्भ्रमित सा मन....
लक्ष्यविहीन व्यर्थ है विस्तार,
विनाशकारी है अहंकार.......
बहुत ही सुंदर रचना, सुधा दी।
हार्दिक आभार ज्योति जी!बहुत बहुत शुक्रिया...
हटाएंआभार अभिलाषा जी ! बहुत बहुत धन्यवाद ।
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जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 26 अगस्त 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
हार्दिक धन्यवाद पम्मी जी मेरी रचना को पाँच लिंको का आनंद के प्रतिष्ठित मंच पर साझा करने हेतु।
हटाएंवाह!सुधा जी ,एक गहरी सीख देती हुई खूबसूरत रचना ।
जवाब देंहटाएंहृदयतल से धन्यवाद शुभा जी!
हटाएंसस्नेह आभार।
हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.जोशी जी!
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