तीन कुण्डलिया :- भारत महान, हार और विचलित
अनुभूति पत्रिका में प्रकाशित तीन कुण्डलिया कुण्डलिया हिन्दी साहित्य का एक लोकप्रिय छंद है जो अपनी लय, भाव और संदेश के कारण पाठकों को आकर्षित करता है। प्रस्तुत हैं तीन कुण्डलिया— 'भारत महान', 'हार' और 'विचलित'। इन रचनाओं में देशप्रेम, संघर्ष में सकारात्मक सोच तथा मानसिक संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया गया है। भारत महान सारे जग मे हो रहा ,भारत का गुणगान । शुभ संस्कारी भावना, है इसकी पहचान । है इसकी पहचान, सभ्यता बड़ी निराली । सर्व धर्म सत्कार, बनाता गौरवशाली । कहे सुधा सुन मीत, लगा लो तुम भी नारे । भारत देश महान, कह रहे जग में सारे।। हार हार करें स्वीकार जो, होते नहीं निराश । सतत परिश्रम कर सदा,मन में रखते आस ।। मन में रखते आस, नहीं बाधा से डरते । गिरकर उठते रोज, कभी ना मन से थकते ।। कहे सुधा निज बात, है यही जीत का सार । करते रहें प्रयास, सौपान बनेगी हार ।। बिचलित विचलित गर मन हो रहा, कर लें प्राणायाम । साधें श्वास - प्रश्वास निज, मिले सुखद आराम ।। मिले सुखद आराम, धैर्य मन में है आता । मिटे बिचार विकार, भाव निर्मल हो जाता ।। कहे सुधा सुन मीत,श्वास साधें जो नियमित...

आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 14 दिसम्बर 2022 को साझा की गयी है...
जवाब देंहटाएंपाँच लिंकों का आनन्द परआप भी आइएगा....धन्यवाद!
रचना को मंच प्रदान करने हेतु हृदयतल से धन्यवाद सखी !
हटाएंउजड़ा सा है जीवन, बिखरे से हैं सपने
जवाब देंहटाएंटूटी सी उम्मीदें , रूठे से हैं अपने
कोरी सी कल्पनाएं, धुंधली आकांक्षाएं.
मन के किस कोने में, आशा का दीप जलाएं ?
हम मन के कोने में, कैसे आशा का दीप जलाएं" ?
समाज और देश की व्यापक परिस्थितियों को आईना दिखाता सार्थक सृजन ।
सारगर्भित प्रतिक्रिया से सृजन को सार्थकता प्रदान करने के लिए दिल से धन्यवाद आ.कुसुम जी !
हटाएंप्रिय सुधा जी, शिक्षित बेरोजगारों का दर्द बहुत ही मार्मिक शब्दों में बडी सहजता से समेट लिया आपने। आखिर डिग्रीधारी ये बेरोजगार आखिर जाएँ भी तो कहाँ जाएँ? ये व्यथा आज की असंतुलित व्यवस्था से पैदा हुई है जहाँ डीग्रीयों के धर जितने बड़े होते जाते हैं रोजगार के अवसर उतने ही सिकुडते जाते हैं।एक सशक्त रचना के लिए आभार और बधाई ❤
जवाब देंहटाएं"जहाँ डीग्रीयों के धर जितने बड़े होते जाते हैं रोजगार के अवसर उतने ही सिकुडते जाते हैं।"बिल्कुल सही कहा आपने ...रचना का मंतव्य स्पष्ट करती सारगर्भित समीक्षा हेतु हृदयतल से धन्यवाद आपका ।
हटाएंबिल्कुल सही कहा आपने, सार्थक सृजन सुधा जी 🙏
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