तीन कुण्डलिया :- भारत महान, हार और विचलित
अनुभूति पत्रिका में प्रकाशित तीन कुण्डलिया कुण्डलिया हिन्दी साहित्य का एक लोकप्रिय छंद है जो अपनी लय, भाव और संदेश के कारण पाठकों को आकर्षित करता है। प्रस्तुत हैं तीन कुण्डलिया— 'भारत महान', 'हार' और 'विचलित'। इन रचनाओं में देशप्रेम, संघर्ष में सकारात्मक सोच तथा मानसिक संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया गया है। भारत महान सारे जग मे हो रहा ,भारत का गुणगान । शुभ संस्कारी भावना, है इसकी पहचान । है इसकी पहचान, सभ्यता बड़ी निराली । सर्व धर्म सत्कार, बनाता गौरवशाली । कहे सुधा सुन मीत, लगा लो तुम भी नारे । भारत देश महान, कह रहे जग में सारे।। हार हार करें स्वीकार जो, होते नहीं निराश । सतत परिश्रम कर सदा,मन में रखते आस ।। मन में रखते आस, नहीं बाधा से डरते । गिरकर उठते रोज, कभी ना मन से थकते ।। कहे सुधा निज बात, है यही जीत का सार । करते रहें प्रयास, सौपान बनेगी हार ।। बिचलित विचलित गर मन हो रहा, कर लें प्राणायाम । साधें श्वास - प्रश्वास निज, मिले सुखद आराम ।। मिले सुखद आराम, धैर्य मन में है आता । मिटे बिचार विकार, भाव निर्मल हो जाता ।। कहे सुधा सुन मीत,श्वास साधें जो नियमित...
आपको होली की हार्दिक शुभकामनाएं।
जवाब देंहटाएंमैं जो रचना पोस्ट कर रहा हूँ इसमें कई फिल्मी गाने छिप हैं। गानों के नाम तथा उनके फिल्म के नाम बताने हैं।
होल के हुड़दंग में, पी के भंग मैं
गोरी के गाल से गुलाल चुरा लूँ।
रंग बरसे तो भींगे चुनर वाली
अंग से अंग मैं साजन लगा लूँ।
आज ना छोड़ेंगे हमजोली
खेलेंगे सब मिल होली।
नीला पीला हरा गुलाबी
रंग सभी ले आली रे आली।
जोगी जी धीरे-धीरे, होली खेले रघुवीरा।
कान्हा खेले राधा के संग, रंग बड़ा अलबेला।
बोली गोरी आजा सारे, मल दे गुलाल मोहे।
ओ भोले भोले सूरत वाले, दूँगी पलट गाली तोहे।
वाह वाह!!!
हटाएंहोली के इतने सारे गाने अलग अलग फिल्मों के...
अच्छा रंग जमाया है आपने...
अनन्त शुभकामनाएं आपको।
आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज मंगलवार 10 मार्च 2020 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंहृदयतल से धन्यवाद आपका रचना साझा करने हेतु....
हटाएंसादर आभार।
अद्भुत और मर्मस्पर्शी मानवीयकरण। बधाई और आभार। होली की सपरिवार शुभकामनायें।
जवाब देंहटाएंहृदयतल से धन्यवाद आदरणीय विश्वमोहन जी ! आपकी प्रतिक्रिया हमेशा मेरा उत्साहवर्धन करती है
हटाएंआपको भी होली की अनन्त शुभकामनाएं।
सादर आभार।
पूनम के चाँद आज तुम उदास क्यों...?
जवाब देंहटाएंदुखी दुखी से हो धरा के पास क्यों.....?
बहुत सुन्दर सृजन सुधा जी ।
सहृदय धन्यवाद मीना जी उत्साहवर्धन हेतु।
हटाएंसस्नेह आभार....।
सार्थक चिंतन देती सुंदर आशावादी सृजन चाँद से बातचीत बहुत मनभावन लगी ।
जवाब देंहटाएंअनुपम।
तहेदिल से धन्यवाद कुसुम जी उत्साहवर्धन हेतु.....
हटाएंसादर आभार।
पूनम के चाँद आज तुम उदास क्यों...?
जवाब देंहटाएंदुखी दुखी से हो धरा के पास क्यों.....?
फाग के रंग भी तुमको न भा रहे,
होली हुड़दंग से क्यों जी चुरा रहे ?
धरा के दुख से हो इतने उदास ज्यों !
दुखी दुखी से हो धरा के पास क्यों ?
आपकी लेखनी की विशेषता है यथार्थ वादी चित्रण।
बहुत सुंदर लेखन सुधा जी।
आभारी हूँ श्वेता जी हृदयतल से धन्यवाद आपका उत्साहवर्धन हेतु....।
हटाएंबहुत सुन्दर । होली की। बधाई हो ।
जवाब देंहटाएंतहेदिल से धन्यवाद आदरणीय सर!
हटाएंआपको भी होली की अनन्त शुभकामनाएं।
सादर आभार।
बहुत सुन्दर । होली की। बधाई हो ।
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (11-03-2020) को "होलक का शुभ दान" (चर्चा अंक 3637) पर भी होगी।
जवाब देंहटाएं--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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रंगों के महापर्व होलिकोत्सव की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
हार्दिक धन्यवाद एव आभार आदरणीय सर!मेरी रचना साझा करने के लिए।
हटाएंबहुत सुन्दर सृजन,सुधा दी।
जवाब देंहटाएंतहेदिल से धन्यवाद, ज्योति जी !
हटाएंसस्नेह आभार आपका।
हृदयतल से धन्यवाद पम्मी जी मेरी रचना साझा करने हेतु...।
जवाब देंहटाएंसादर आभार।
बहुत सुन्दर
जवाब देंहटाएंहृदयतल से धन्यवाद कविता जी !
हटाएंसादर आभार।
बहुत खूबसूरत सृजध सुधा जी ।होली की हार्दिक शुभकामनाएं ।
जवाब देंहटाएंसहृदय धन्यवाद शुभा जी !
हटाएंसस्नेह आभार।
शुभकामनाएं होली की जरा सी देर के साथ। सुन्दर रचना।
जवाब देंहटाएंहृदयतल से धन्यवाद जोशी जी !
हटाएंसादर आभार।
होली का मज़ा इस बार फीका रहा पर शायद समय यही चाहता था ... करोना का डर जो ज़रूरी भी है या कुछ सर्दी ...
जवाब देंहटाएंपर आपकी काव्य रस धारा निर्विरोध है ... सुंदर रचना और समय अनुसार ... बहुत बधाई फागुन के रंगों की ...
हदयतल से धन्यवाद नासवा जी !आपका प्रोत्साहन हमेशा प्रेरक होता है....
जवाब देंहटाएंआपको भी बधाई एवं अत्यन्त आभार।
बहुत सुंदर सृजन
जवाब देंहटाएंसादर
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आभारी हूँ सर !बहुत बहुत धन्यवाद आपका...।
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