प्रीत की बरखा लिए, लो आ गए ऋतुराज

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  बाग की क्यारी के पीले हो गये हैं हाथ प्रीत की बरखा लिए, लो आ गए ऋतुराज  फूल,पाती, पाँखुरी, धुलकर निखर गयी श्वास में सरगम सजी, खुशबू बिखर गयी भ्रमर दल देखो हुए हैं प्रेम के मोहताज प्रीत की बरखा लिए, लो आ गए ऋतुराज  । आम बौराने लगे, कोयल मधुर गाती ठूँठ से लिपटी लता, हिलडुल रही पाती लगती बड़ी बहकी हवा, बदले से हैं अंदाज प्रीत की बरखा लिए, लो आ गए ऋतुराज  । सौंधी महक माटी की मन को भा रही है अंबर से झरती बूँद  आशा ला रही है  टिपटिप मधुर संगीत सी  भीगे से ज्यों अल्फ़ाज़ प्रीत की बरखा लिए, लो आ गए ऋतुराज । पढ़िये एक और रचना निम्न लिंक पर ●  बसंत की पदचाप

मंगलमय नववर्ष हो

 नववर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

Happy new year


बीत गया पच्चीस अब, बिसरें बीती बात ।

मंगलमय नववर्ष हो, सुखमय हो दिन रात।

शुभता का संदेश ले,  आएगा  छब्बीस ।

दुर्दिन होंगे दूर अब , सुख की हो बरसात ।।


स्वागत आगत का करें , अभिनंदन कर जोर ।

सबको दे शुभकामना , आये स्वर्णिम भोर ।

घर आँगन खुशियाँ भरे, विपदा भागे दूर,

सुख समृद्धि घर में बसे, खुशहाली चहुँओर ।।



हार्दिक शुभकामनाओं के साथ एक और रचना निम्न लिंक पर

● और एक साल बीत गया


टिप्पणियाँ

  1. वाह्ह दी अति सुंदर सृजन।
    सस्नेह प्रणाम।
    सादर।
    ------
    जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार २ जनवरी २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    नववर्ष २०२६ मंगलमय हो।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हार्दिक धन्यवाद एवं आभार प्रिय श्वेता ! रचना को मंच प्रदान करने हेतु ।

      हटाएं
  2. यह कविता पढ़ते ही मन अपने आप हल्का और सकारात्मक हो जाता है। आप बीते पच्चीस को सहजता से विदा करते हैं और नए वर्ष छब्बीस का खुले दिल से स्वागत करते हैं। मुझे इसकी सबसे अच्छी बात यह लगी कि आप उम्मीद, शुभकामना और विश्वास को बहुत सरल शब्दों में रखते हैं। नए साल की शुबकामनाएं

    जवाब देंहटाएं

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