प्रीत की बरखा लिए, लो आ गए ऋतुराज

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  बाग की क्यारी के पीले हाथ होते आज प्रीत की बरखा लिए, लो आ गए ऋतुराज  फूल,पाती, पाँखुरी, धुलकर निखर गयी श्वास में सरगम सजी, खुशबू बिखर गयी भ्रमर दल देखो हुए हैं प्रेम के मोहताज प्रीत की बरखा लिए, लो आ गए ऋतुराज  । आम बौराने लगे, कोयल मधुर गाती ठूँठ से लिपटी लता, हिलडुल रही पाती लगती बड़ी बहकी हवा, बदले से हैं अंदाज प्रीत की बरखा लिए, लो आ गए ऋतुराज  । सौंधी महक माटी की मन को भा रही है अंबर से झरती बूँद  आशा ला रही है  टिपटिप मधुर संगीत सी  भीगे से ज्यों अल्फ़ाज़ प्रीत की बरखा लिए, लो आ गए ऋतुराज । पढ़िये एक और रचना निम्न लिंक पर ●  बसंत की पदचाप

सैनिक, संत, किसान (दोहा मुक्तक)

Sainik, sant, kisan poem


सैनिक

रक्षा करते देश की, सैनिक वीर जवान ।

लड़ते लड़ते देश हित, करते निज बलिदान ।

ओढ़ तिरंगा ले विदा,  जाते अमर शहीद,

नमन शहीदों को करे, सारा हिंदुस्तान ।।


संत

संत समागम कीजिए, मिटे तमस अज्ञान ।

राह सुगम होंगी सभी, मिले सत्य का ज्ञान ।

अमल करे उपदेश जो, होगा जीवन धन्य,

मिले परम आनंद तब, खिले मनस उद्यान ।


किसान

खून पसीना एक कर , खेती करे किसान

अन्न प्रदाता है वही, देना उसको मान ।

सहता मौसम मार वह, झेले कष्ट तमाम,

उसके श्रम से पल रहा सारा हिंदुस्तान ।




        सैनिक, संत, किसान

1) सीमा पर सैनिक खड़े, खेती करे किसान ।

   संत शिरोमणि से सदा,  मिलता सबको ज्ञान।

   गर्वित इन पर देश है , परहित जिनका ध्येय,

   वंदनीय हैं सर्वदा, सैनिक संत किसान ।।



2) सैनिक संत किसान से,  गर्वित हिंदुस्तान ।

    फर्ज निभाते है सदा,  लिये हाथ में जान ।

    रक्षण पोषण धर्म की,  सेवा पर तैनात,

     करते उन्नति देश की,  सदा बढ़ाते मान ।।



हार्दिक अभिनंदन आपका 🙏

पढ़िए एक और रचना निम्न लिंक पर

● मुक्तक - नसीब


टिप्पणियाँ

  1. वाह !! अति सुन्दर सृजन । विविधता से परिपूर्ण अनूठी अभिव्यक्ति सुधा जी !

    जवाब देंहटाएं
  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर मंगलवार 26 अगस्त 2025 को लिंक की जाएगी ....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!

    !

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हार्दिक धन्यवाद आ.रविंद्र जी !मेरी रचना चयन करने हेतु ।
      सादर आभार ।

      हटाएं
  3. सैनिक, संत और किसान देश और समाज के हित में दिन-रात लगे रहते हैं, सुंदर दोहे!

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत हि सुंदर मुक्तक, सुधा दी।

    जवाब देंहटाएं

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