जीवन की राहों में आखिर असली प्रतिस्पर्धा किससे है ? | प्रेरणादायक लेख
जीवन की राहों में असली प्रतिस्पर्धा किससे है?
बचपन से परीक्षाओं में अव्वल रहने वाले लोग अक्सर यह मान लेते हैं कि वे जीवन की हर प्रतिस्पर्धा में सफल होंगे। लेकिन क्या सच में ऐसा होता है?
जीवन की राहों में असली प्रतिस्पर्धी कौन?
बचपन से परीक्षाओं में उत्तीर्ण और कक्षा में उत्तीर्ण रहने वाले लोगों को अपनी बुद्धिमानी पर कभी कोई संदेह नहीं रहता । उन्हें विश्वास हो जाता है कि जीवन की हर परीक्षा भी वे अपनी बुद्धि के बल पास कर ही लेंगे ।
लेकिन अक्सर वे नहीं जानते कि जीवन की परीक्षाएं कुछ अलग होती हैं — यहाँ प्रतिस्पर्धी अपने ही होते हैं।
अपनों से प्रतिस्पर्धा का सच
यह सच सामने आता भी है, तो वे सोचते हैं —
"अपनों से प्रतिस्पर्धा में भला क्या डर!"
हार भी अपनी और जीत भी अपनी ।
आगे बढ़ने की कीमत: अकेलापन
इसीअपनत्व और स्नेह के भाव के साथ वे आगे बढ़ते हैं।
लेकिन जैसे ही वे दूसरों से दो कदम आगे निकलते हैं, वे खुद को अकेला पाते हैं।
क्यों खींचते हैं लोग पीछे?
क्योंकि अपनों के साथ होने वाली ऐसी प्रतिस्पर्धाएं अक्सर आगे बढ़ने की होती ही नहीं, ये प्रतिस्पर्धाएं तो किसी को आगे बढ़ने से रोकने की होती हैं ।
हाँ ! ये प्रतिस्पर्धाएं ऊपर उठने की नहीं,
बल्कि ऊपर उठने वाले को नीचे खींचने की होती है।
जो लोग न तो पीछे धकेले जाते हैं और न ही नीचे गिराए जाते हैं,
वे जीवन की राहों में अकेले रह जाते हैं।
और फिर अक्सर भुला दिये जाते हैं , अपनों द्वारा । या फिर त्याग दिए जाते हैं, गये बीतों की तरह ।
उनके सभी अपने वहीं रहते हैं -- सब एक साथ , और जाने वाले का गढ़ देते है अपना मनचाहा प्रारूप, मनचाही छवि ।
ऐसे में आगे बढ़ने वालों को भी खुशी नहीं मिलती,
बल्कि एक गहरा मलाल रह जाता है।
असली प्रतिस्पर्धा खुद से है
उन्हें लगता है कि उनका कोई अपना नहीं ,जो उनके सुख-दुख में साथ हो । वे अकेले हैं और अब उनका कोई प्रतिस्पर्धी भी नहीं।
मन की खिन्नता के चलते वे पीछे भी लौट नहीं पाते और आगे बढ़ना भी उनके लिए निरर्थक सा हो जाता है ।
फिर वे भी ठहर से जाते हैं तब तक, जब तक उन्हें बोध नहीं होता--
कि हमारी असली प्रतिस्पर्धा दूसरों से नहीं, बल्कि खुद से है ।
आपकी राय क्या है? क्या आपको भी कभी अपनों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा है? कमेंट में जरूर बताएं।
✨धन्यवाद🙏
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जीवन का सब से बड़ा सत्य यही है सुधा जी !बहुत सुन्दर चिन्तन परक सृजन ।
जवाब देंहटाएंजी, मीना जी ! अत्यंत आभार एवं धन्यवाद आपका ।
हटाएंसार्थक एवं चिंतनपरक लेख
जवाब देंहटाएंसही
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर सुधा संदेश 🙏🏼🙏🏼🙏🏼
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंसच है इंसान को अपनी सोच से लड़ना होता है ... आगे आना होता है ...
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