मोल्यारी मास म्यर पहाड़ मा | गढ़वाली गीत
क्या आप भी बार-बार अपनी पुरानी बातों और दुखद यादों में खो जाते हैं?
क्या बीता हुआ कल आज की खुशियों पर भारी पड़ता है?
यदि हाँ, तो “बीती ताहि बिसार दे” केवल एक कहावत नहीं, बल्कि जीवन को सरल और सुखी बनाने का एक गहरा मंत्र है।
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| अतीत को छोड़कर ही वर्तमान में सच्ची खुशी मिलती है । |
अतीत का दामन थामें मन कभी-कभी अतीत के भीषण बियाबान में पहुँच जाता है और भटकने लगता है — उसी तकलीफ के साथ जिससे वर्षों पहले उबर भी चुका था।
दुखद यादें धीरे-धीरे मन और ध्यान में उतर जाती हैं। वे बीते घावों की पपड़ियाँ खुरचकर उस दर्द को फिर से ताज़ा कर देती हैं। हमें पता भी नहीं चलता कि यादों के झुरमुट में फँसकर हम अनजाने में उन्हीं कष्टों को दोबारा जी रहे होते हैं, जिनसे हम बड़ी बहादुरी से पार पा चुके थे।
कहा जाता है कि हम जिस पर ध्यान केंद्रित करते हैं, वही हमारे जीवन में बढ़ने लगता है। ऐसे में, जब हम बार-बार बीते दुखों का ध्यान करते हैं, तो हमारी नकारात्मक सोच हमारे वर्तमान के अच्छे दिनों को भी प्रभावित करने लगती है। यही कारण है कि “अतीत को कैसे भूलें” यह सवाल आज बहुत लोगों के मन में रहता है।
परंतु मन आज में टिकता ही कहाँ है! वह या तो भविष्य के सपनों में भटकता है या फिर अतीत की यादों में उलझा रहता है।
युवावस्था में यही मन आने वाले कल (भविष्य) के सुनहरे सपनों से भरा रहता है और हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, मन अतीत की यादों में जाकर पुराने अनुभवों और दुखों का हिसाब लगाने लगता है — और यहीं से मानसिक उलझनें शुरू होती हैं।
यदि हम चाहें, तो इन यादों के झुरमुट से कुछ खुशियाँ, अच्छे अनुभव और सीख लेकर उन्हें अपने वर्तमान में उतार सकते हैं। साथ ही, नकारात्मक अनुभवों को "लेट गो" करके तटस्थ भाव से वर्तमान पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
“बीती ताहि बिसार दे” हमें सिखाता है कि अतीत को छोड़कर ही हम अपने आज को बेहतर बना सकते हैं।
कहीं ऐसा न हो कि बीती हुई नकारात्मक यादें हमारी जागरूकता को बोझिल करके हमारी आज की खुशियों को भी फीका कर दें। इसलिए जरूरी है कि हम वर्तमान में जीना सीखें और जीवन को सकारात्मक दिशा दें।
✨धन्यवाद🙏
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यादों के झुरमुट से
जवाब देंहटाएंकुछ खुशियाँ,
कुछ अच्छे अनुभव और
ज्ञान लेकर
झटपट वर्तमान की झोली में
डाल नकारात्मक
अनुभवों की यादों को
लेट गो करके
व्वाहहहह
सादर
बिल्कुल सही बात है ।
जवाब देंहटाएंजीवन यात्रा में खट्टी-मीठी स्मृतियों की पोटलियाँ ही एकमात्र पूँजी ही जो साँसों के साथ खनकती रहती है हमारे मन के गलियारों में आजीवन और समय की बारिश में स्मृतियों की सारी कड़ुवाहट फीकी पड़ जाती है बस इतनी सी बात है।
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर जीवन दर्शन लिखा है आपने।
सस्नेह।
सादर।
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जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना मंगलवार ८ जुलाई २०२५ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
बहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंसत्य है |
जवाब देंहटाएंअच्छा लिखा है। मन का काम ही है बीते समय में भटकना।
जवाब देंहटाएंसार्थक बोध देते शब्द
जवाब देंहटाएंसार्थक सारगर्भित अभिव्यक्ति सुधा जी , साथाही संदेश प्रद।
जवाब देंहटाएंहार्दिक बधाई सुंदर आलेख के लिए।
बहुत खूबसूरत आलेख
जवाब देंहटाएंसार्थक चिंतन के साथ जीने के कला ही जीवन की नकारात्मक प्रवृत्तियों को दूर करती हैं । आपके प्रेरक विचार हृदय के क़रीब लगे । बहुत सुन्दर पोस्ट ।
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