तीन कुण्डलिया :- भारत महान, हार और विचलित
अनुभूति पत्रिका में प्रकाशित तीन कुण्डलिया कुण्डलिया हिन्दी साहित्य का एक लोकप्रिय छंद है जो अपनी लय, भाव और संदेश के कारण पाठकों को आकर्षित करता है। प्रस्तुत हैं तीन कुण्डलिया— 'भारत महान', 'हार' और 'विचलित'। इन रचनाओं में देशप्रेम, संघर्ष में सकारात्मक सोच तथा मानसिक संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया गया है। भारत महान सारे जग मे हो रहा ,भारत का गुणगान । शुभ संस्कारी भावना, है इसकी पहचान । है इसकी पहचान, सभ्यता बड़ी निराली । सर्व धर्म सत्कार, बनाता गौरवशाली । कहे सुधा सुन मीत, लगा लो तुम भी नारे । भारत देश महान, कह रहे जग में सारे।। हार हार करें स्वीकार जो, होते नहीं निराश । सतत परिश्रम कर सदा,मन में रखते आस ।। मन में रखते आस, नहीं बाधा से डरते । गिरकर उठते रोज, कभी ना मन से थकते ।। कहे सुधा निज बात, है यही जीत का सार । करते रहें प्रयास, सौपान बनेगी हार ।। बिचलित विचलित गर मन हो रहा, कर लें प्राणायाम । साधें श्वास - प्रश्वास निज, मिले सुखद आराम ।। मिले सुखद आराम, धैर्य मन में है आता । मिटे बिचार विकार, भाव निर्मल हो जाता ।। कहे सुधा सुन मीत,श्वास साधें जो नियमित...

आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज रविवार 26 एप्रिल 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंसहृदय धन्यवाद यशोदा जी! मेरी रचना को सांध्य दैनिक मुखरित मौन में साझा करने हेतु...
हटाएंसादर आभार।
सुधा दी,किशोरावस्था की उलझन को आपने बहुत ही खूबसूरती से व्यक्त किया हैं। हर इंसान की किशोरावस्था में यहीं हालत होती हैं।
जवाब देंहटाएंजी ज्योति जी!तहेदिल से धन्यवाद आपका मेरे विचारों से सहमत होने हेतु...
हटाएंसस्नेह आभार।
उलझन में हूँ समझ न आता
जवाब देंहटाएंऐसे मुझको कुछ नहीं भाता
बड़ा हो गया या हूँ बच्चा !
क्या मैं निपट अकल का कच्चा ? बहुत सुंदर रचना किशोरावस्था की उलझन को व्यक्त करती।
सस्नेह आभार भाई !
जवाब देंहटाएंसुनो माँ अब तो बात मेरी
जवाब देंहटाएंऔर आर करो या पार!
छोटा हूँ तो बचपन सा लाड दो
हूँ बडा़ तो दो अधिकार !
टीवी मोबाइल हो या कम्प्यूटर
मेरे लिए सब लॉक
थोड़ी सी गलती कर दूँ तो
सब करते हो ब्लॉक... बेहतरीन सृजन आदरणीया दीदी 👌
बहुत बहुत धन्यवाद अनीता जी! उत्साह वर्धन हेतु...
हटाएंसस्नेह आभार।
ये किशोरावस्था होती ही ऐसी है ...।बहुत ही उम्दा सृजन सुधा जी ।
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत धन्यवाद,शुभा जी!
हटाएंबेहतरीन रचना सखी
जवाब देंहटाएंसहृदय धन्यवाद एवं आभार सखी!
हटाएंसुन्दर सृजन
जवाब देंहटाएंअत्यंत आभार एवं धन्यवाद जोशी जी !
हटाएंसहृदय धन्यवाद अनीता जी रचना साझा करने हेतु।
जवाब देंहटाएंअभूतपूर्व जी, हमारे ब्लॉग पर भी जरूर देखें प्रेरणादायक सुविचार
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